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चुनाव में सेल्फ़ी का जमाना है
चुनाव में सेल्फ़ी का जमाना है,वोट डाल कर सेल्फ़ी लेना है,तर्जनी की स्याही दिखाना है,भारतीय नागरिक कहलाना है। अब के…
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चाय
विधा:कविताशीर्षक: खनकती चाय प्याली खनकती चाय प्याली, सवेरे का मधुर गान,धुएँ में घुलती खुशबू, जैसे जीवन का सम्मान। चुस्की में…
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उस दल में गुल गुले खिलाते हैं
राजनीति का खेल चतुराई,चालाकी भरा हुआ होता है,इसे चतुर खिलाड़ी खेलते हैं,मूर्ख लोग इसकी चर्चा करते हैं। राजनीति की चर्चा…
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अति दोहन जब प्रकृति का
अति दोहन जब प्रकृति का, ऐसा हो परिणाम।हुआ जानलेवा “विकल” जेठ दुपहरी घाम।। बिना घोषणा के लगा, कर्फ्यू सा चहुँओर।लोग…
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इक दफा हमको पराया तो करो
हर अज़ा पे हक जताया तो करो,इक दफ़ा हमको पराया तो करो।। नज़रें झुका कर कुछ फ़रमाइए,साथ में एक गुलाब…
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21 मई 1991 – फेरे अर फेर
रस : हास्य रस + करुण व्यंग्यछंद : कुंडलिया – 13-11 मात्रा, तुकांत, मालवी छौंक 1इक्कीस मई ब्याव म्हारो, गाँव…
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गाँव का प्रातःकालीन जीवन
भोर हुई, सूरज निकला, फैली सुनहरी लाली,ओस भरी हर पत्ती लगती, जैसे मोती वाली। मुर्गे की मधुर बाँग से, जाग…
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स्वयं संघर्ष की राह
चावल से कंकड़ चुनना,हर गृहिणी की आदत होती है,वैसे ही जीवन की राहों में,संकटों की भी आहट होती है। कोई…
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पवित्रता
मेरे किताब के पन्नों मेंछपा है प्यार का गीत,गीतों में लिखा है मैंनेअपना पवित्र प्रीत।न कोई शहनाईऔर न ही कोई…
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गर्मी की छुट्टी
विधा – बाल कविता देखो गर्मी की छुट्टी आई!सूरज दादा चमके भाई,आसमान में फैला ताव,बस्ता बंद हुआ है अपना,चलो चलें…
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