
वटवृक्ष से विशाल थे पापा
हम बच्चों के संसार थे पापा
हम सब उनके पत्ते और शाखाएं हैं
धूप में शीतल छाया थे पापा
बारिश में सिर पर छाता थे पापा
सारे कष्टों को रोक सके
वैसे दृढ़ प्रहरी थे पापा
जो दिखने पर कड़वे लगते
पर शक्ति दायिनी नीम थे पापा
उनके कड़वे शब्द हमारे लिए एक शिक्षा थी
हर ठोकर से लड़ने की एक सफल दीक्षा थी
महानता की नींव थे पापा
हमारे जीवन का श्रेष्ठ संस्कार थे पापा
जब हम अबोध और नादान थे
सारी जरूरतों को पूरी करते थे पापा
हमारी पेट भरने की खातिर
खुद भुखे रह जाते थे पापा
त्याग की प्रतिमूर्ति थे पापा
सारी दुनिया की सैर कराते
वो मजबूत कंधे थे पापा
जिस तरह ईश्वर दिखते नहीं
सिर्फ महसूस किए जाते हैं
उसी तरह पिता के प्रेम दिखते नहीं
सिर्फ महसूस किये जाते हैं
प्रेम के सागर थे पापा
अनुशासन में महान थे पापा
हम सबके आदर्श थे पापा
आगे बढ़ने का साहस थे पापा
हमारे लिए ईश्वर का उपहार थे पापा
चुका न पायेंगे पापा का कर्ज
चाहे निभा लें कितने भी फर्ज
हर पीड़ा को स्वयं सह लेते
फिर भी मुँह से कभी आह न करते
अपने लिए अभाव सहते
पर हमारी हर खुशी पूरी करते थे पापा
सब अपने थे जब जीवित थे पापा
हो गए बेगाने सब जब नहीं हैं पापा
संबंधों को जोड़ने वाले पुल थे पापा
हम सबके पहचान थे पापा
सागर की गहराई थे पापा
हम सबके अभिमान थे पापा
हमारे लिए धैर्य और विश्वास थे पापा
हिम्मत और बलिदान थे पापा
पूरा करते हर अरमान थे पापा
हम सबके सम्मान थे पापा
प्राची में उगते सूर्य थे पापा
जीवित रूप में भगवान थे पापा
चांद तारे और आसमान थे पापा
हमारे जीवन का सम्पूर्ण जहान थे पापा
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड













