
माँ कालरात्रि : भय-विनाशिनी, शुभफलदायिनी
नवरात्रि के सातवें दिन, माँ कालरात्रि का ध्यान करें,
श्रद्धा के पावन दीप जलाकर, माँ का गुणगान करें।
दुर्गा माँ के सातवें स्वरूप में, शक्ति अपरंपार है,
भक्तों के कल्याण हेतु, माँ का दिव्य अवतार है॥
कालरात्रि नाम में छिपा है, काल-रात्रि का गूढ़ विधान,
अंधकार के बीच चमकता, माँ के तेज का दिव्य वितान।
घोर तिमिर में ज्योति जगाकर, जग को राह दिखाती हैं,
दुष्ट शक्तियों का नाश करके, धर्म की अलख जगाती हैं॥
श्यामवर्ण तन, खुले केश हैं, रूप बड़ा विकराल है,
तीन नेत्रों से दिव्य तेज का, होता अद्भुत संचार है।
चार भुजाओं में शक्ति-सामर्थ्य, अनुपम तेज समाया है,
माँ के रौद्र रूप में भी, करुणा का सागर लहराया है॥
दाएँ हाथों में वर-मुद्रा, अभय-मुद्रा का उपहार,
भक्तों को देतीं निर्भयता, करतीं भवसागर से पार।
बाएँ हाथों में अस्त्र धारण कर, दुष्टों का संहार करें,
धर्म-सत्य की रक्षा करके, भक्तों का उद्धार करें॥
गर्दभ पर आरूढ़ भवानी, अद्भुत महिमा वाली हैं,
दुष्टों के विनाश हेतु, शक्ति की ज्वाला धारी हैं।
भयावह रूप देखकर भी, भक्त न भयभीत हों कभी,
माँ की कृपा जहाँ बरसती, अमंगल टिकता नहीं कभी॥
शुभंकारी नाम सुहावन, मंगल की पहचान है,
भक्तों के जीवन में माँ, आशा का वरदान हैं।
रौद्र रूप में छिपी हुई है, ममता की मधुर फुहार,
माँ कालरात्रि की कृपा से, खिल उठता संसार॥
भूत-प्रेत और दुष्ट शक्तियाँ, माँ के तेज से हारें,
नकारात्मकता दूर भगाकर, जीवन में उजियारे भरें।
ग्रह-बाधाओं से मुक्ति की, भक्त लगाते आस हैं,
माँ के पावन नाम-स्मरण में, अटूट विश्वास है॥
अग्नि, जल और शत्रु-भय से, रक्षा करने वाली माँ,
संकट की हर घड़ी में, साहस भरने वाली माँ।
रात्रि-भय के घोर तिमिर में, आशा का दीप जलाएँ,
अपनी कृपा की छाया देकर, भक्तों को निर्भय बनाएँ॥
सहस्रार चक्र की साधना में, मन एकाग्र हो जाता है,
माँ के दिव्य स्वरूप का चिंतन, अंतर्मन को भाता है।
ज्ञान, शक्ति और आत्मबोध का, पावन पथ खुल जाता है,
माँ की कृपा से साधक का, जीवन सफल हो जाता है॥
मन, वचन और कर्म की पावनता, साधक का शृंगार बने,
संयम, नियम और सत्याचरण, जीवन का आधार बनें।
एकनिष्ठ होकर माँ का सुमिरन, श्रद्धा से करते जाएँ,
भक्ति, प्रेम और सेवा से, माँ का आशीष पाएँ॥
गुड़ का भोग लगाकर मैया, भक्त शीश झुकाते हैं,
धूप-दीप और पुष्प चढ़ाकर, मंगल गीत सुनाते हैं।
सच्चे मन से जो भी माँ की, पावन ज्योति जगाता है,
माँ का आशीष उसके जीवन में, सुख-समृद्धि बरसाता है॥
हे माँ! मन के अंधकार को, अपनी ज्योति से हरना,
द्वेष, अहंकार और दुर्भावों को, करुणा से दूर करना।
सत्य-धर्म के पथ पर चलने का, हमको बल दे देना,
अपने चरणों में रखकर मैया, शुभ आशीष दे देना॥
जय-जय माँ कालरात्रि भवानी, जय दुर्गे कल्याणमयी,
तेरी महिमा अपरंपार, तू भक्तों की सुखदायिनी।
सातवें दिन तेरी वंदना, श्रद्धा से करते हैं हम,
तेरी कृपा बनी रहे माँ, यही विनती करते हम॥
रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार













