
सदा प्रकृति की पूजा करके,
पर्यावरण बचाएं!
आने वाले कल को अपने,
सुंदर सुलभ बनाएं!!
स्वच्छ सलोने जग को अपना,
अनुपम ठौर बनाएं!
बहे विकास की गंगा फिर,
सुख संपत्ति घर लाएं!!
वृक्षारोपण करें सदा हम,
कभी न इनको काटें!
प्राणवायु की कमी न होगी,
खुशियां सबमें बांटें!!
वरना फिर पछताना होगा,
मलना होगा हाथ!
रोग दोष से पीड़ित होंगे,
कोई न देगा साथ!!
प्रकृति नियंता कभी न रूठे,
रखना इसका ध्यान!
शाश्वत नियम का पालन करना,
ना करना अपमान!!
करें सदा ओजोन परत का,
‘जिज्ञासु’ जन संरक्षण !
सुंदर, स्वच्छ, सलोने जग का,
पल पल हो दिग्दर्शन!!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’













