
माता पिता भक्त वह, श्रवण कुमार यह,
कहें कथा पौराणिक , सबको सुनाइए।
लेकर कांवर चले, नेत्रहीन दोनों भले,
तीर्थ इच्छा पूर्ण करें,गुणगान गाइए।
लौटे सर तट आये,लोटा जल लेने धाए,
कलकल ध्वनि हुई,नेमी भरमाइए।
जंगली पशु को माना,तीर चलाया निशाना,
श्रवण आहत हुए,नेमी सकुचाइए।
श्रवण पालक शाप,नेमी लगा अभिशाप,
पुत्र वियोग मरण, होगा जान लीजिए।
पुत्र हो श्रवण सम, सेवा भाव हरे गम ,
संतान संस्कारी बने , भाव को जगाइए।
पावन श्रवण क्षेत्र , तमसा अवध क्षेत्र,
लगता है मेला यहाॅं , प्रेरणा ही पाइए।
लगी है श्रवण मूर्ति , भक्ति भावना की पूर्ति ,
कीजिए दर्शन यहाॅं , दिल में उतारिए।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार













