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उम्र के समंदर में,

उम्र के समंदर में
मौज़ दर मौज़
आती जा रही,
गोया के जवानी की रवानी
हर मौज़ लेती जा रही।

चेहरे की लुनाई,
जेहन की शहनाई,
हर बार बदलती जा रही।

ख़्वाब ओ ख्वाहिशों में
अब रश्क बढ़ता जा रहा,
तू वफ़ा है!!!
मेरी रग ए जां को
ये एतबार आता रहा।

तू है! तेरा सरूर है!
यकायक ये मेरा
ग़रूर बढ़ता जा रहा।

तेरी रूह से हो
रु ब रु
मेरे जेहन में
तेरा अक्स गहराता
जा रहा।

सूर्य कांत शर्मा
पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रसारणकर्मी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दिल्ली।
संपर्क – 79826 20596

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