
दादी ! आज तुम्हारी बहुत ज्यादा याद आ रही हैँ,
इतनी ज्यादा की खुद को संभालना मुश्किल हो रहा हैँ।
पता हैँ दादी कुछ लोग कहते हैँ,
समय समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाता हैँ।
लेकिन शायद उन्हें कभी दादी की कमी महसूस नहीं हुई होंगी ना।
दादी तुम्हारे जाने के बाद ना,
सब कुछ तो वैसा ही हैँ, ये घर भी, लोग भी रिश्तेदार भी पर फिर भी सब कुछ अधूरा सा लगता हैँ।
अब कोई ये नहीं पूछता दादी मुझसे,
खाना खाया? इतना चुप क्यो हैँ?
बोल ना कुछ, थक गया हैँ क्या?
और सच कहूं दादी
दुनियां के इस भीड़ में रह कर भी,
बहुत अकेला महसूस करता हूँ।
कभी कभी बस दिल करता हैँ,
सब छोड़ कर तुम्हारे पास आ जाऊ।
तुम्हारी गोद में सर रख कर थोड़ा रो लू,
थोड़ा और जी लूँ आपके साथ आ जाऊ ना।
दादी अगर कही से सुन रही हो ना,
तो बस एक बार वापस आ जाओ ना।
या मुझें ही अपने पास बुला लो ना।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)













