
विषय – वो आखिरी मुलाकात
कांपती सांसें थीं तुम्हारी,
मेरी आँखों में बरसात थी,
जब हमारे बीच वो दर्द में डूबी,
वो आखिरी मुलाकात थी।
तुमने धीमे से थामी हथेली मेरी,
पर किस्मत हमारे खिलाफ थी,
हाय! टूटती साँसों के साए में हुई,
वो आखिरी मुलाकात थी।
तुम बोलना चाहते थे बहुत कुछ,
पर होठों पर बेबसी छाई थी,
उस ठंडे पड़ते बदन में भी,
प्रेम की एक सिसकी समाई थी।
मैंने माथा चूमा तुम्हारा,
तो तुम्हारी एक पलक झपकी थी,
जैसे कह रहे हो “विदा प्रिये”,
वही जुदाई की वो घड़ी थी।
सब सो गए तसल्ली से,
पर मेरी उजड़ती कायनात थी,
हाँ! मेरे जीवन का अंत बनी,
वो आखिरी मुलाकात थी।
मांग का सिंदूर जैसे रो-रोकर,
अपना वजूद मिटा रहा था,
हाथों का वो कंगन कलाई में,
तड़पकर शोर मचा रहा था।
तुमने आँखें मूँद लीं ऐसे,
कि फिर कभी वो खुली ही नहीं,
मैंने पुकारा टूटकर तुम्हें,
पर तुम्हारी कोई आवाज़ मिली ही नहीं।
चले गए तुम वहां,
जहाँ न दिन था और न रात थी,
सांसों की डोर छुड़ाकर गई,
वो आखिरी मुलाकात थी।
अब ये सूनी सेज है मेरी,
और यादों का जलता अलाव है,
इस भरे-पूरे संसार में,
बस एक गहरा सा घाव है।
कैसे भूलूँ वो पल जब रूह तुम्हारी,
जिस्म छोड़ आगे बढ़ गई,
मेरी हथेली पर तुम्हारे हाथ की,
वो ठंडी छुअन सदा के लिए मढ़ गई।
अलविदा मेरे देवता!
जहाँ ख़त्म हमारी हर बात थी,
आँसुओं के समंदर में डूबी हुई,
वो आखिरी मुलाकात थी।
हाँ, वो आखिरी मुलाकात थी…
रीना पटले शिक्षिका
शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश













