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नेत्रदान दिवस

भले नेत्रदान महादान होता है साहेब लेकिन लाखों करोड़ों में कोई एक ही दान करता है

लेकिन जो दान करता है साहेब फिर उसी का नाम नेक नीयत में सामने आता है

क्योंकि नेत्रदान सचमुच में इस संसार में बहुत ही नाजुक अंगदान होता है साहेब

अगर हम सब एक दूजे को इस तरह का मदद करें तो संसार में कोई नेत्रहीन नहीं रहेगा

लेकिन अफ़सोस कि यही बात है साहेब इस संसार में हर किसीका नेकनीयत नहीं होता है

जो हर किसी को नेत्र मिल जाए और उसको नयन में फिर से ज्योंति मिल जाए

क्योंकि अन्नदान पानी दान वस्त्रदान रक्तदान कोई सही से कर नहीं पाता है

क्योंकि कुछ भी दान करने के लिए इंसान को बहुत ही नेक इंसान बनना पड़ता है

चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,

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