
गूँजी किलकारी आँगन में, आया वो अनमोल पल।
बुआ ने गोदी में लिया, आँखें हुई सजल ॥
लेकर काजल की डिबिया, बुआ पास है आई।
आँखों में आँजियो काजल, मन में ख़ुशी समाई ॥
हँसकर माँगे नेग बुआ, भैया-भाभी मुस्काय।
शगुन का पाकर नेग बुआ, फूली नहीं समाय ॥
नजर न लागे लाल को, बुआ हिय हुलसाय।
माथे सोहे चाँद का टीका, देख छवि बलि जाय ॥
खिलौने छुपाए कोने-कोने, रचे नए नित ढंग।
दौड़-दौड़ कर थक गई बुआ, जीत रहा वो जंग ॥
अकड़ दिखावत किसलिए, नखरे बड़े दिखाए।
रिमोट कार छुपा के अपनी, मंद-मंद मुस्काए ॥
नटखट तेरी ये अदा, मन में बसी अपार।
सामान सारा बिखरा पड़ा, बुआ मान गई हार ॥
गली-गली में शोर मचाए, रोके सबकी राह।
मम्मी-पापा तंग आ गए, मन में उठी कराह ॥
चितवन से जादू करे, बोले मीठे बोल।
चॉकलेट जो मांगनी हो, मिश्री जैसे घोल ॥
मटकी तो नहीं, पर रसोई का डिब्बा दे हिलाय।
पकड़ा जाए चोरी में तो, झटपट ही शरमाय ॥
दादी-दादा व्याकुल भई, थकित भई सब चाल।
कैसा आफत ढा गयो, भैया को ये लाल ॥
चोरी-चोरी फ्रिज खोले, आइसक्रीम खात।
मुंह पर सारा रंग लगा के, मासूमियत दिखाता ॥
किलकारी की तान पे, घर है रहा लुभाय।
रोते-रोते हँस दे ऐसा, पत्थर भी पिघलाय ॥
बुआ की गोदी में आके, सारा रोब जमाय।
चुपके से चश्मा छुपाए, फिर खुद ही चिल्लाय ॥
लाख करे ये शरारतें, पर है जिगर का टुकड़ा।
देख बुआ का दिल खिले, इसका प्यारा मुखड़ा ॥
जुग-जुग जीवे ये लाल मेरा, खुशियाँ मिले अपार।
बुआ सदा देती रहे, इस नटखट को प्यार ॥
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश













