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कल्प प्रगीत आनंद वात्सल्य ज्योत्सना पर्व में भक्ति, साहित्य और सेवा का अनुपम संगम।

दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा की काव्य रचनाओं पर आधारित पत्रिका राधा रस रश्मियां का विमोचन

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की असीम कृपा एवं प्रेरणा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा के जन्मदिवस के पावन उपलक्ष्य में “वात्सल्य ज्योत्सना पर्व” का भव्य आयोजन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और साहित्यिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन भक्ति, सेवा, संस्कृति एवं साहित्य के समन्वित स्वरूप का सजीव उदाहरण बनकर उपस्थित हुआ।

संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष अवसर पर विविध रचनात्मक एवं लोकमंगलकारी गतिविधियों का आयोजन किया गया। दतिया मध्यप्रदेश स्थित विश्वविख्यात माता पीताम्बरा बगलामुखी शक्तिपीठ में कल्पकथा परिवार की ओर से डॉ. श्रीमती मंजू शकुन खरे ने माता के दर्शन एवं पूजन-अर्चन कर विश्व शांति, मानव कल्याण तथा राष्ट्र की समृद्धि हेतु मंगलकामनाएँ अर्पित कीं। साथ ही श्रद्धालुओं के मध्य प्रसाद वितरण कर सेवा-संस्कार की भावधारा को पुष्ट किया।

इसी क्रम में सूरदास सीही, फरीदाबाद हरियाणा में डॉ. श्रीमती जया शर्मा प्रियंवदा द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया तथा पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर जीवमात्र के प्रति करुणा एवं संवेदना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा की विशिष्ट काव्य रचनाओं पर आधारित साहित्यिक पत्रिका “राधा रस रश्मियाँ” का लोकार्पण रहा। रायगढ़ छत्तीसगढ़ के प्रबुद्ध साहित्यकार अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’ के सुसंस्कृत मंच संचालन में आयोजित इस समारोह का संयोजन श्रीमती कीर्ति त्यागी द्वारा किया गया। द ग्राम टुडे समाचार पत्र समूह के सौजन्य से प्रकाशित इस विशेषांक का लोकार्पण साहित्यिक गरिमा और भावपूर्ण वातावरण के मध्य संपन्न हुआ।

लोकार्पण समारोह में डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय, श्रीमती गरिमा वार्ष्णेय, डॉ. जया शर्मा प्रियंवदा, डॉ. मंजू शकुन खरे, पवनेश मिश्र सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं सुधीजन उपस्थित रहे। वक्ताओं ने दीदी राधा श्री शर्मा के स्नेहमय व्यक्तित्व, साहित्य-साधना, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन में उनके अविस्मरणीय योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के निमित्त सामूहिक गायन किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति के पावन भावों से अनुप्राणित हो उठा। तत्पश्चात आभार प्रदर्शन के उपरांत “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति-पाठ के साथ आयोजन को सादर विश्राम प्रदान किया गया। यह आयोजन साहित्य, संस्कार, सेवा और सद्भाव की उन दिव्य ज्योतियों का उत्सव सिद्ध हुआ, जो समाज में सकारात्मक चेतना एवं मानवीय मूल्यों के आलोक का सतत प्रसार कर रही हैं।

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