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संशय से भरी,प्रेम निवेदन

कोई थी.. लेकिन अभी नहिं है ,
पास है, लेकिन दूर कहीं है ,
कभी गलत थी, लेकिन अब सही है
महसूस होता है, यहीं कहीं है ।

मन है मिलने का, लेकिन भय है
कुछ तो अभी भी संशय है
पता नहीं कैसा महसूस होगा
दिल मे यही बात का मची प्रलय है ।

लेकिन मिलना तो. अब होगा ही
जो भी सोचने का है,वो सोचेगा ही
अब भय रखकर मन मे, दूरी कैसा??
जीवन उसके बिना भी चलेगा ही ।

बस यही सोचकर आ जाना है,
सारे गिले शिकवे भूला देना है,
ये नश्वर तन का कोरोला नही है,
कभी भी त्यागना, आ सकता है।

कह देंगे सुनो मेरी अर्जी ,
पहले जैसा बनो,या बना लो दूरी ,
मेरे तरफ से,मिट गये सारे शिकायत
अब,रखो चाहे ना रखो,जो मर्जी ।

चुन्नू साहा पाकुड़ झारखंड

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