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बेबसी का इज़हार

लिखा तो हमसे कुछ जाता नही
हाल-ए-दिल बयाँ किया जाता नही

प्यार तुमने गर किया था
ए दिल सितम हमने भी सहा था

आँसुओ के समंदर मे तुम तन्हा ना थे
रोने को कंधा हमे भी कहाँ नसीब था

जिंदगी तो थी जब दीदार तुम्हारा होता था
अक्स पर खुद मे ही एतबार पल पल होता था

जुबाँ खामोश थी दिल से इज़हार हर पल था
तुम्हारे इंतज़ार पर मेरा इंतज़ार भी कहाँ कम था

बेजार मन बेजान जिस्म मे तमन्ना अब कोई बाकी नही रही
तुमसे ही ए मेरे मीत जिंदगी हमारी भी चल रही

जब तलक ए दिल तुम्हारा दीदार था
वास्ते ही मेरा तेरे सारा साज श्रृंगार था

जुदाई मे तुम क्या हम भी जीते जी मर गये
अरमान जीने के सारे दिल मे ही दफन हो गये

दुनियाँ हमे मारकर हम ही से फिर जीने की उम्मीद करती है
मानों भरोसे की इमारत ढहाकर फिर बुलंदी की तिजारत करती है

साथ जीवन का ना सही मौत का हो जाये
ना जिये साथ तो क्या जाये तो साथ जाये

प्यार तो तुम्ही थे तुम्ही मेरी पहली आखरी ख्वाहिश हो
बरबाद इश्क के साये तले मेरी तुम्हारी साथ रवाईश् हो


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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