
विश्व बालश्रम निषेध दिवस विशेष।
भीख नहीं अधिकार मांगते,
शिक्षा और बस प्यार मांगते।
खुब खेलना यूं हम है चाहते,
हमारे चेहरे पर मुस्कान लौटादे।।
दर दर की हम ठोकरे खाते,
बस्ते का हम भार है ढोहते।
हम मैरीट का दबाव भी सहते,
अपने अरमानो का गला दबाते।।
मोबाइल से यूं दुर चले हम,
बचपन को पंख लगाये हम।
बरसात मे हम सब नाचे गायें,
प्यार के मीठे दो बोल सुनाए।।
ईर्ष्या, द्वेष ना कभी हम रखते,
नित एक दुजे का सहयोग करते।
हम सदैव बडो़ का आदर करते ,
भारत का हम भविष्य कहलाते।।
फुटपाथ पर ना हमको छोडे़,
ज्ञान की हमको राह दिखलाए।
हेय दृष्टि से ना कोई हमको देखे,
मन्नू प्यार से हमको गले लगाए।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।













