
अवसर- विश्व बालश्रम् दिवस
मुफलिसी की बेगज़ब ये कैसी बेबसी है
खेलने खाने की उम्र मे कमाने की मजबूरी है
तरक्की का खेल सिर्फ कागजों पर ही होता है
बाल श्रम की वजह से बालपन आज भी रोता है
रोटी आज भी एक चुनोती है
कितनी संताने भूखे पेट सोती है
विकास की आँधी मे गरीब उड़ गये
अमीर चलते फिरते ख़ुदा बन गये
शिक्षा स्वास्थ्य उदर पूर्ति बाल मन का मूलभूत अधिकार है
बचपन संभालना सँवारना ही फर्ज़ ईमान सरकार है
बाल श्रम कानूनी अवैध है किंतु बदस्तूर जारी है
बालश्रम रोकना सरकार समाज की अहम जिम्मेदारी है
बाल पन संभलेगा तो देश संभ्रांत संपन्न बनेगा
बालश्रम् रुकेगा तो युवा देश का कर्णधार बनेगा
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













