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बेटे भी पराए होते हैं

उठकर पानी तक न पीने वाले,
अब अपने कपडे खुद धो लेते है।

कल तक जो घर के सबसे लाडले थे,
आज वही अकेले में चुपचाप रो लेते है।

बाप की डांट के बाद माँ से शिकायत करने वाले,
अब ज़माने के ताने हंसकर सह लेते है।

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते है………

खाने में सौ नखरे करने वाले, आज उसी बहन को याद करके आँख भर लेते है।

माँ के बाजू में सिर रख कर सोने वाले,
अब सुकून से कही भी सो लेते है।

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते है………

सच तो ये है,
घर छोड़ने के बाद
बेटे भी अंदर से टूट जाते है…..

जेब खर्च के लिए पापा से लड़ने वाले,
अब महीने की आख़िरी तारीख़ गिन लेते हैं।

माँ के हाथ के परांठे को न कहने वाले,
अब होटल की रोटी को तरस जाते हैं।

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते है………

त्योहार पर नए कपड़ों की ज़िद करने वाले,
अब पुरानी शर्ट से ही दिवाली मना लेते हैं।

हर छोटी चोट पर घर सिर पर उठाने वाले,
अब बुखार में भी खुद से दवा खा लेते हैं।

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते है………

वीडियो कॉल पर हँस के कहते हैं “सब ठीक है”,

फोन रखते ही तकिया भीगो लेते हैं।
सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते हैं…

जब माँ की आवाज़ सुनकर गला भर आता है,
पर “मिस यू” कहने से पहले ही फोन काट देते हैं।

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते है………

सर्वाधिकार सुरक्षित मौलिक अधिकार एवं अप्रकाशित रचनाएँ

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)

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