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नशे की गिरफ्त में युवा भारत

युवा शक्ति है राष्ट्र की धड़कन,
उज्ज्वल जिसका कल होता,
नशे की काली छाया पड़ते,
जीवन पथ विफल होता।

सपनों की आँखों में अक्सर,
लक्ष्य सुनहरे पलते हैं,
मादक जाल में फँसकर लेकिन,
सारे अरमान जलते हैं।

माता-पिता की आशाओं का,
टूट रहा विश्वास यहाँ,
नशे की आदत बन बैठी है,
जीवन का संत्रास यहाँ।

शिक्षा, संस्कारों की राहें,
धूमिल होती जाती हैं,
क्षणिक सुखों की चाह मनुज को,
गहरी खाई लाती हैं।

युवा देश का भविष्य हैं,
यह बात सभी अपनाएँ,
स्वस्थ तन और निर्मल मन से,
नव भारत को सजाएँ।

मित्रों के बहकावे में आ,
जीवन मत बरबाद करो,
अपने स्वर्णिम लक्ष्य हेतु,
दृढ़ संकल्प आबाद करो।

खेल, कला, साहित्य साधना,
जीवन को मधुमय करती,
सकारात्मक सोच सदा ही,
मानव की तकदीर सँवरती।

आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
नशा-मुक्त अभियान चलाएँ,
घर-घर जागृति दीप जलाकर,
जन-जन को संदेश सुनाएँ।

युवा शक्ति जब जाग उठेगी,
बदलेगा परिवेश सारा,
नशे की जंजीरें टूटेंगी,
होगा भारत जग से न्यारा।

सदाचार, संयम और श्रम से,
नई दिशा निर्माण करें,
नशा-मुक्त युवा भारत का,
मिलकर हम उत्थान करें।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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