
न मंच न माईक सिर्फ फेशबुक पे आङे तिरछे शब्द चित्र बनाना ‘क्या आपको मेरे कवि होने पे शक नही ।
अरे भाई मुजे न शोहरत के तमगे हासिल हे ‘ ईसके दमपे कवि केसे हो सकता मेरे पास सिर्फ ऐक नन्हा सा दिल हे ।
कुछ लोगो का कहना हे यदि मुजे कवि होना हे तो ‘ किसी मुखोटेबाज महाकवि के चरण दबाने होगे ।
मंचपे चलने के लिये अपने सिद्धांत से हटकर ‘लोगो को हंसाने को चुटकुले सुनाने होगे ।
अरे भाई कोई यूही थोङे कवि हो जाता हे ‘ आपके पास कवि सम्मेलन कराने कि ओकात होना चाहिये।
कवि होने के लिये मेरे दोस्त किसी बङे नेता का आपके शिश पर दुआओं का हाथ होना चाहिये ।
कविता आपने लिखी हो या आपके बापने ‘मंच पे सलीके से पेश होने का ढँग होना चाहिये।
आपकी कविता कोई मायने नही रखती आप कामयाब कवि ‘आपके हाव भाव पर तालियो कि बजती म्रदँग होना चाहिये ।
मे ईन सारी शर्तो को पुराकरने मे यदि असमर्थ हूं
मे सिर्फ शब्द घसियारा ‘ साहित्य के कवच मे केद मंचसे दुर केवल भावनाओं कि जमी पिघलती बर्फ हूं













