
नशा करना है तो पढ़ने लिखने का नशा करों अनपढ़ रहने में क्या रखा है।
नशा करना है तो कुछ बनने का करों कुछ न बनकर जीने में क्या रखा है।।
नशा करना है तो यह जीवन सवांरने का करों जीवन बिखेरने में क्या रखा है।
नशा करना है तो परिवार के साथ रहने का करों परिवार से दूर रहने में क्या रखा है।।
क्योंकि जिंदगी आज है साहेब कल क्या भरोसा है बिना भरोसे जीने में क्या रखा है।
जीना है तो मोहब्बत से जियों किसीसे नफ़रत करके जीने में क्या रखा है।।
नशा करना है तो दारू शराब का ही क्यों करना है दारू शराब में क्या रखा है।
क्योंकि दारू शराब का नशा तो लिवर किडनी जीवन खराब कर देता है।।
जितना हो सके उतना ही नशे से दूर रहो नशे में मशहूर होने में क्या रखा है।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













