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पिता

पिता, वरदान ईश का,
होता बड़ा महान ।
कड़वी औषधि नीम सा,
घर की है मुस्कान ।
पोषण करते एक सा,
सबका रखते ध्यान।
हो विशाल वट पेड़ ज्यों,
देता छांव समान।
मलहम जैसे घाव में,
होती पीड़ा दूर।
जीवन में साहस भरे,
विपदा होती चूर।
वरद हस्त जब पितृ का,
सफल सभी हों काज।
सबकी फिर चिंता मिटे,
सुख के बजते साज ।
करो कभी भी नहि दुखी,
सदा रखो तुम साथ।
हर संकट टलता रहे,
सिर पे हो जब हाथ।

डॉ.नवनीता दुबे नूपुर..मंडला मप्र

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