
हर तन- मन को है जरूरी योग
तभी कर सकते हैं मानव जीवन का
भोग
आओ हम सब मिल करें योग
रखे हमेशा काया स्वस्थ और निरोग
सूर्योदय से नित्य पहले उठकर
निवृत्त हो नीति क्रियाकलाप
तब करें सांसो को लेना और छोड़ना
जिसे कहते हैं प्राणायाम
करें भ्रामरी और भस्त्रिका
तत्पश्चात अनुलोम विलोम, कपाल की
भाती
रोम -रोम ऊर्जावान हो उठती
स्वास्थ्य हो अच्छा तो सब कुछ है अच्छा लगता
सुख से जियें सभी सुखी हो
आओ हम योग को अपनाएं
जीवन को सफल बनाएं
योग स्वास्थ्य की संजीवनी बूटी
नहीं है यह कोई और घूंटी
इसे करके तन -मन को जगाना है
आओ हम इसे अपनाएं
भारत देश को आगे बढ़ाएं
अब कोई ना हो बीमार
योग करें प्राण तत्व का संचार
सबका होगा जीवन गुलजार
डॉ मीना कुमारी परिहार













