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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

शंख चक्र कर में लिए,शैया शेष निवास।
चरणों में प्रभु ठाँव दो,दूर रहो या पास।
करुँ भजन नित आपका, रहूंँ न मद में चूर,
सांँसे जब तक मम चले, पूर्ण करो यह आस।।

हृदय पृष्ठ पावन करो, दया धर्म हो मूल।
ध्यान रहे परमार्थ का, खिलें कर्म के फूल।
मिले कृपा प्रभु आपकी, सुखदायक परिणाम,
मात-पिता गुरु को कभी, मिले न मुझसे शूल।।

प्रथम नमन हो मातु को, दूजे पिता प्रणाम।
तीजे गुरुवर को नमन,तब प्रभुवर का नाम।
नियमित शिष्टाचार हो,परि परिजन से प्रीत,
सत्य निष्ठता देश से,भाव यही अविराम।।

जिनके रूप अनेक हैं,माँ लक्ष्मी के नाथ।
उनसे करती प्रार्थना,सदा झुका कर माथ।
संकट सारे टालना,जग में आप महान,
गीता जपती नाम है,सिर पर रखिए हाथ।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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