
संस्कार और विश्वास के नींव है पापा,
बच्चों की खुशियों में खुश हो जाते है,
प्यार से भरी खुशियों का पिटारा है पापा
मां पैरों पर चलना सिखाती है, पैरों पर
खड़े होना सिखाते है पापा,
कंधों पर बिठाकर घुमाते है पापा,
हर मुश्किल में ढाल बन खड़े होते है पापा,
दुखों का साया न पड़े चारहदीवारी बन जाते
है पापा,
हर परिस्थितियों में संघर्ष को साथी बनाना
सिखाते है पापा,
हर मुसीबत में मार्गदर्शक बन सही राह
दिखाते है पापा,
धन्य है वो हर दर्द को छिपाकर मुस्कुरातें
है पापा,
जिनके नाम के बिना हम अधूरें है,
उस नाम को पूरा करने वाले शब्द है पापा,
पापा सिर्फ नाम नहीं वो पूरी दुनियां होतें हैं,
जो खामोश रहकर हमारी दुआं बन जाते हैं,
अपनी खुशियां छिपाकर हमपे खुशियां लुटाते
हैं पापा,
अनमोल खजाना हैं पापा,
अनमोल खजाना हैं पापा
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़













