
क्या दिया तुमने हमें जन्म देकर ऐहसान नहीं किया तुम्हारी अय्याशियों का परिणाम हे हम!
हम सच कहते पापा तुमसे बेकार बुढापे मे बंद किजिये ये फोकट का धर्म कर्म!
देखते नहीं हमारे स्वयं के बच्चे हे ईनका भविष्य भी तो हमें बनाना हे!
रहना हे साथ हमार् तो समजोतावादी बनकर रहो वर्ना अनाथालय में तुम्हारा ठिकाना हे!
वक्त के साथ चलना सिखो सर मत पटका करो सुविधा की दिवार में!
तुम्हारी उर्म नहीं रही घुमने की अब बेकार घुमने के ख्वाब छोडदो कार मे!
बुढे रंगे सियार की तरह मत किया करो अपने ईस खंडहरी तनको सजाने पे खर्चा!
यार तुम्हारे पापा ईस उर्म मे भी रंगिन कपडे पहनते दोस्त कर रहे थे पापा ये चर्चा!
कमाते कुछ नहीं ओर ये अच्छा नहीं लगता वो अच्छा नहीं लगता ईस निगोडी जबान पर लगाम लगाओ!
अगर फिजुल खर्चे से बाज नहीं आते हो तो अब नहीं सह सकते हम तुम्हें तुम आत्महत्या करके मर जाओ!
ये कोई कहानी नहीं कविता नहीं कलियुग की संतानो की मतलबपरस्त सच्चाई हे!
मैस्वयं कुछ नहीं लिख सकता ये भाव चिन्तन लिखके लोट गई आशु कवि के मनसे शारदेमाई













