
योग सुधा का पान कर, तन-मन हो बलवान,
प्राणायाम की शक्ति से जागे नव उत्साह महान।
सूर्य नमस्कार की प्रभा, तन में स्फूर्ति भरती है,
पद्मासन की शांति मन की व्याकुलता हरती है।
अनुलोम-विलोम साधकर, शुद्ध रहें सब प्राण,
योग साधना से बढ़े आत्मबल और सम्मान।
नियमित योग अपनाइए, स्वास्थ्य का यह सार,
रोग-दोष सब दूर हों, सुखमय हो संसार।
योग चेतना का दीप बन, अज्ञान तम मिटाए,
निरोगी काया, उज्ज्वल जीवन का संदेश सुनाए।
डाॅ. सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













