
नाचने में, मेहमान नवाज़ी, जयमाल में,
फोटो सेसन करवाने में घंटों लगा देंगे,
पंडित जी जल्दी करो जल्दी करो,
विवाह वेदी पर आते ही कहने लगेंगे।
पंडित जी बेचारे क्या करते, वह भी
सब स्वाहा स्वाहा ही कहते जाते हैं,
जब खुद बर्बाद होना चाहते हों तो,
रातभर पंडित जी को क्यों जागना है।
उसको भी अपनी जीविका चलानी है,
आवश्यक कार्य के लिए समय नहो,
पर रिश्तेदार, भाई, बंधुओं के साथ,
सात फेरों को पवित्रता से करवाना है।
जहां मद्यपान व मांसाहार करते हैं,
उस विवाह स्थल पर आशीर्वाद देने,
आप अपने सच्चे हृदय से सोचिए,
देवी देवता तो कदापि नहीं आते हैं।
नाचना कूदना, खाना-पीना जो भी
करना है सब विवाह के बाद करो,
विवाह विधि निश्चित मुहूर्त पर हो,
वैदिक विधि तन मन से संपन्न करो।
पवित्र स्थल पर पवित्र होकर गुरुजनो,
बड़े बुजुर्गों का विवाह आशीर्वाद मिले,
मांगलिक कार्य जिसमें सब आये हों
अपने देवी देवताओं को तो नहीं भूलें।
सोलह संस्कार सम्पन्न कराने में विधि
विधान का पूरा पूरा ध्यान रखा जाये,
आदित्य सनातन संस्कृति और वैदिक,
रीति रिवाजों का पूरा मान रखा जाये।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













