
योग-सुधा का पान कर,
तन-मन हो बलवान।
रोग-दोष सब दूर हों,
मिले नव जीवन-ज्ञान।।
प्राणायाम की शक्ति से,
जागे नव उत्साह।
नित्य योग-अभ्यास से,
मिटे तनाव अथाह।।
सूर्य नमस्कार प्रातः करें,
तन में भरे उमंग।
पद्मासन की शांति से
जीवन बने सत्संग।।
अनुलोम-विलोम साधकर,
शुद्ध रहें सब प्राण।
योग करे निरोग तन,
बढ़े आत्मसम्मान।।
नियमित योग अपनाइए,
यही स्वास्थ्य का सार।
निरोगी काया पा सकें,
सुखमय हो संसार।।
योग दिवस का पावन अवसर,
स्वास्थ्य-सुधा बरसाता है।
तन-मन को नव शक्ति देकर,
जीवन-पथ महकाता है।।
योग जोड़ता आत्मा-तन को
अंतरदीप जलाता है।
संयम, साधन, सत्कर्मों का,
सुंदर पाठ पढ़ाता है।।
भस्त्रिका की दिव्य साधना,
ऊर्जा नई जगाती है।
ध्यान-योग की निर्मल धारा,
मन की कलुष मिटाती है।।
योग हमारी प्राचीन धरोहर,
ऋषियों का वरदान है।
स्वस्थ, समर्थ और सुखी
जीवन,इसका ही प्रतिदान है।।
आओ मिलकर योग अपनाएँ,
जन-जन तक संदेश पहुँचाएँ।
निरोग बने भारत का हर जन,
स्वस्थ विश्व का स्वप्न सजाएँ।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












