
सूरज की पहली किरण जब धरती को चूमे
तन-मन को जगाने का मंत्र लिखे — योग।
न भागना है, न लड़ना है किसी से
खुद से मिलने का तंत्र लिखे — योग।
साँस आई, साँस गई, ये खेल नहीं है
हर साँस में जीवन का ग्रंथ लिखे — योग।
कमर झुकी, गर्दन अकड़ी, मन भटका सा
सीधा करे, जोड़े, एक पंथ लिखे — योग।
न मंदिर, न मस्जिद, न कोई दीवार
हर हृदय में ईश्वर का कंठ लिखे — योग।
पद्मासन में बैठा जब ‘मैं’ मिट जाता है
‘हम’ का पवित्र सिद्धांत लिखे — योग।
तनाव की नदी जब माथे पर बहती है
शवासन में शांति का संत लिखे — योग।
बूढ़े की लाठी, जवान की शक्ति
बच्चे की हँसी का बसंत लिखे — योग।
ऋषियों ने दिया, विश्व ने अपनाया
भारत की मिट्टी का दिगंत लिखे — योग।
21 जून को बस आसन नहीं करना
जीवन जीने का वेदांत लिखे — योग।
आओ बिछाएँ चटाई, छोड़ें बहाने सारे
आज फिर से अपना अनंत लिखे — योग।
21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)












