Uncategorized
Trending

मैं एक पिता हूँ,

मैं एक पिता हूँ,
ओम कश्यप

मैं एक पिता हूँ,
चुपचाप सब सह जाता हूँ,
अपने सपनों को पीछे रखकर,
बच्चों के सपने सजाता हूँ।
जब सारा घर सो जाता है,
मैं कल की चिंता करता हूँ,
उनकी खुशियों की खातिर ही,
हर दिन संघर्ष करता हूँ।

मैं एक पिता हूँ, मेरी भी एक कहानी है,
मेरी मुस्कान के पीछे छिपी कई कुर्बानी है।
मेरे बच्चों की हँसी ही मेरी पहचान है,
उनकी खुशियों में ही मेरी सारी शान है।
न आँसू अपनी आँखों के,
दुनिया को दिखलाता हूँ,
कड़ी धूप में खुद जलकर,
घर का साया बन जाता हूँ।
जब बच्चा पहली बार चले,
दिल मेरा गर्व से भर जाता है,
उसकी हर छोटी सफलता में,
मेरा जीवन निखर जाता है।

मैं एक पिता हूँ, मेरी भी एक कहानी है,
मेरी मुस्कान के पीछे छिपी कई कुर्बानी है।
मेरे बच्चों की हँसी ही मेरी पहचान है,
उनकी खुशियों में ही मेरी सारी शान है।
एक दिन उम्र ढल जाएगी,
रफ्तार भी थम जाएगी,
पर मेरी दुआओं की छाया,
हर पल उनके साथ जाएगी।
न धन-दौलत, न महल चाहिए,
न कोई बड़ा खजाना है,
मेरे बच्चों का उज्ज्वल भविष्य,
बस वही मेरा खजाना है।

मैं एक पिता हूँ, यही मेरा अभिमान है,
अपने बच्चों के लिए जीना ही मेरी पहचान है।
फादर्स डे पर बस इतना कहना चाहता हूँ,
तुम मेरी दुनिया हो, तुम पर ही सब कुछ वारता हूँ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *