
पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः।
पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवताः॥
अर्थ : पिता ही धर्म हैं, पिता ही स्वर्ग हैं और पिता ही परम तपस्वी हैं। पिता के प्रसन्न होने पर सभी देवता प्रसन्न हो जाते हैं।
यस्य पिता गृहे नास्ति चिंता तस्य गृहे सदा।
यस्य पिता गृहे चास्ति चिंता तस्य न कुत्रचित्॥
अर्थ : जिसके घर में पिता नहीं होते, उसे सदैव चिंता घेरे रहती है; किन्तु जिसके सिर पर पिता का साया होता है, उसे किसी भी प्रकार की चिंता नहीं रहती।
स्थूलं शरीरं पुत्रेभ्यो निक्षिप्य च परत्र वै।
स्वयं कृशतरं भुङ्क्ते स पिता किं न पूज्यते॥
अर्थ : जो पिता अपने पुत्रों के सुख, समृद्धि और भविष्य के लिए स्वयं कष्ट सहते हुए अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है, ऐसा त्यागमूर्ति पिता निःसंदेह पूजनीय है।
आज पितृ दिवस के पावन अवसर पर परमपूज्य गुरुदेव एवं पूज्य पिताश्री पण्डित द्वारिका प्रसाद मिश्र जी (गोलोकवासी) की पुण्य स्मृतियों को कोटिशः नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इस अवसर पर श्रीमद्जगद्गुरु निम्बार्काचार्य विद्यावारिधि अनन्तश्री विभूषित स्वामी अतुल कुमार मिश्र जी महाराज, पीठाधीश्वर, श्रीनिम्बार्क पीठ, वृन्दावन तथा श्रीनिम्बार्क सेवा संस्थान, अमेठी की ओर से समस्त सनातन धर्मावलम्बियों, वैष्णव वृन्द, श्रीनिम्बार्क विश्व परिवार एवं श्रद्धालुजनों को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलाशंसाएँ।
॥ पितृदेवो भव ॥
॥ जय श्री राधे ॥
श्रीमद्जगद्गुरु निम्बार्काचार्य विद्यावारिधि
स्वामी अतुल कुमार मिश्र जी महाराज
पीठाधीश्वर, श्रीनिम्बार्क पीठ, वृन्दावन
श्रीनिम्बार्क सेवा संस्थान, अमेठी
श्रीनिम्बार्क गाँव, गौरीगंज, अमेठी (उ.प्र.) भारत












