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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

भोग विलास के दौर है
चऊं ओर ही भौतिकता का जोर है

मन की चन्चलता पर मनुष्य मजबूर है
सादा जीवन उच्च विचार अब अपनी सोच से भी दूर है

वजह मनुष्य रोगों की दुकान हो गया
काम का होके भी बेकाम हो गया

योग ही मानसिक शारीरिक व्याधियोंं का निदान है
सुचारूं जीवन जीने का एकमात्र विधान है

योगी ही मन कर्म से सुचिता को अपनाते है
जीवन का सार समझ ईश्वर मे ध्यान लगाते है

शुद्ध जीवन का एक ही पथ योग है
हर व्याधि दुष्कर्मो से कारण वियोग है

योग प्राण है
सुचिता का जीवन्त प्रमाण है

योग प्रभु स्तुति का एक माध्यम भी है
मन ओर कर्म के एक प्रगतिकारक समागम भी है

गर जीवन मे योग है
आप निश्चित निरोग है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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