
अपना ख़्याल रखना कहा तो उसने पर कहा माना तो देखा न गया।
यह तंज था या रंजो गम के निशां जो माना सबब हमने तो देखा न गया।।
मंजूर था ही नही दर असल खुश रहना हमारा हजूर उसको जो देखी मुस्कान चेहरे पे हमारी तो देखा न गया।।
हसरत उनकी तकलीफ थी और रखना खबर बस हमारी हटाई जो समझ फितरत उनकी तस्वीर अपनी तो देखा न गया।।
इक बार आईने ने ही दिखा थी शक्ल हमारी अक्ल थी बस उसमे कि खुद ही देखा न गया।।
अब कहना उनका कि ख़्याल रखना आया समझ हमारी कि कहा क्या ही उसने गजब अय्यारी अंदाज भी वाजिब बस यही देखा न गया।।
संदीप शर्मा सरल।













