
धरती को उजियारा बांटे करें चहुं ओर ज्ञान प्रकाश,
यह रवि धरती को रोशन करे,
वो रवि जगमगाएं आकाश,
कर्तव्य परायण होकर जीवन समर्पित हो फैलाए प्रकाश ,
निरंतर प्रयास करें प्रतिदिन टीचर्स का विश्वास,
यही गर्व है मेरे ईमान का,
किसी के भी काम आना,
यही धर्म है इंसान का ।
न धन से न जायदाद से,न खुद को कद से नाप तौल,
बड़ा बनना है तो बस सेवा में गुज़रे सारा जीवन इंसान का ,
नहीं शुभ दिन दुजा कोई ऐसा,
टीचर्स डे के समान सा।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













