
मेरे प्यारे मनमोहना, मनमोहना
तुम्हारी छवि है
अति न्यारी मनमोहना
रास रचैया वृंदावन के
वासी मनमोहना
राधा तुम्हारी दर्शन को
प्यासी मनमोहना
तुम बिन सुख ,चैन
कैसे पाएं मनमोहना
वंशी बन जाऊं तेरे
होठों से लगा जाऊं मनमोहना
पल-पल रोती राधा
तेरी याद में मनमोहना
बिरहा की मारु मनमोहना
कब से तेरी राह तक रही मनमोहना
अंखियां हर पल बरस रही
मनमोहना अब दरस दिखा दो मनमोहना
छोड़ के अपनी काशी, मथुरा
ओ मेरे मनमोहना
आओ बसों मेरे नैनों में नंदलाल मनमोहना
तुम तो श्याम सलोने नंदलाला
मनमोहना
तेरे ही दरस को नित प्यासी मनमोहना
आ जाओ चितचोर सांवरिया मनमोहना
मैंने प्यारे मनमोहना, मनमोहना
डॉ मीना कुमारी परिहार













