
किसी ने गुरु को दीप कहा, किसी ने आफ़ताब कहा,
किसी ने उसे ज्ञान कहा, किसी ने ख़्वाब कहा।
किसी ने कहा—गुरु संस्कारों की बुनियाद है,
किसी ने कहा—गुरु ही जीवन का संवाद है।
कबीर की वाणी में गुरु का नूर दिखाई देता है,
तुलसी के शब्दों में गुरु का सुरूर दिखाई देता है।
रहीम की विनम्रता में तालीम का असर मिलता है,
टैगोर की शिक्षा में मुक्त मन का सफ़र मिलता है।
दिनकर जी की कलम में गुरु राष्ट्र की आवाज़ है,
महादेवी जी की संवेदना में गुरु का मधुर अंदाज़ है।
बच्चन जी की पंक्तियों में संघर्ष का पैग़ाम है,
हर सच्चे शिक्षक के कारण ही शिष्य का मुक़ाम है।
**न वह शोहरत माँगता है, न कोई इनाम चाहता है,
बस वह अपने शिष्य को कामयाब देखना चाहता है।
अपनी पूरी ज़िंदगी जिसका एक ही अरमान है—
“उसके शिष्य की कामयाबी ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है।”
सलाम उस कलम को, जो तक़दीर लिखती है,
सलाम उस ज़ुबाँ को, जो तस्वीर लिखती है।
सलाम उन शिक्षकों को, जिनकी तालीम से
हर पीढ़ी अपने हिंदुस्तान की तक़दीर लिखती है।
स्वरचित एवं मौलिक
✍️धर्मेंद्र कुमार राठौर
व्याख्याता भौतिक विज्ञान
पीएम श्री राज.उच्च माध्य.विद्या.
झालावाड़ राजस्थान













