
अमीरी केवल धन-दौलत का नाम नहीं होती,
गरीबी केवल खाली जेबों से नहीं होती।
किसी के पास महल, मगर दिल में अँधियारा,
किसी की कुटिया में खुशियों का उजियारा।
कितना पैसा है, इससे अमीरी नहीं मापी जाती,
पैसे की भूख हो तो तिजोरी भी भर नहीं पाती।
जिसको मिल जाए सब, फिर भी पाने की चाह रहे,
वह धनवान होकर भी मन से निर्धन ही रहे।
गरीब समझकर जिसको हम सहायता देते हैं,
क्या उसके हाथों को श्रम का अवसर देते हैं?
सहायता से पहले श्रम का सम्मान सिखाएँ,
आत्मनिर्भर बनने की राह उसे दिखाएँ।
मेहनत को हेय समझकर जो हाथ पसारता है,
वह अवसर पाकर भी अपना भाग्य सँवारता नहीं।
श्रम की हर बूँद में स्वाभिमान का धन है,
ईमान की कमाई ही जीवन का सच्चा धन है।
जिस दिन मन में संतोष का दीप जल जाएगा,
लोभ का अँधियारा अपने आप मिट जाएगा।
तब न कोई अमीर, न कोई गरीब कहलाएगा,
संतोषी मन ही सच्ची अमीरी पाएगा।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













