Vijay Kumar
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साहित्य
मित्रता
मित्र बनाना है तो श्रीकृष्ण को मित्र बनाना चाहिए,कृष्ण सो मित्र नहीं,प्रेम भोग का नाम नहीं है,, प्रेम योग का…
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साहित्य
अषाढ़ के पानी
विधा: कविता (वियोग) अषाढ़ के पानी बरसे, भीग गई हर डाली,सूनी मेरी राह मगर, सूनी रही दीवाली। बादल ने संदेशा…
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साहित्य
शीशे के सामने भविष्य दिखाई देता है
विधा- काव्य शीशा आदमी का अक्स होता हैबदलते समय का अहसास होता हैशीशे मे आदमी का करम दिखाई देता हैशीशे…
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साहित्य
कुछ तुम भी लिखो, कुछ मैं लिखता हूँ
कुछ तुम भी लिखो, कुछ मैं लिखता हूँ,तुम उदासी लिखो, मैं प्यार लिखता हूँ। ग़म के आईने में यूँ न…
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साहित्य
सैलाब , बाढ़ , जल – प्रलय
विधा : पद् इंद्र जगे देख बादल जागा ,बादल देख जागा बयार ।चला बयार बादल धकेल ,जहाॅं था बयार को…
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साहित्य
चरित्र का बागी
विधा : पद्य जो जाग जाग सोते हैं , अंदर के बुरे वे होते हैं ।अंदर के बुरे जो होते…
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साहित्य
नदी का स्वभाव
नदी का स्वभाव है,सदा बहते ही रहना,सीखा ही नही कभी वो,कही रूक जाना,पर्वत, पहाड से निकली ,वो स्वतंत्र होकर,उछलते कुदते…
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साहित्य
धोखा मत दो किसी को
धोखा मत दो किसी को जीवन में,यह बहुत बड़ा अपराध है|विश्वास मत तोड़ो किसी का भी,यह विश्वास घात है |…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
आज दिखावे में लगा, सारा ही संसार।तुलना करने में मनुज,करता खर्च हजार।भूल गए हनुमान को, लूट रहे हैं राम,मिले कर्म…
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साहित्य
अनेकता में एकता
फुल कभी खिलते नहीं , कलियां हि खिलतीं है। सूरते तो मिलती नहीं,भावनाएं हि मिलती है। सपनों को साकार करने…
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