Vijay Kumar
-
साहित्य
शौक
तरह-तरह के शौक है जग में,शौक बिना सब कुछ बेकार।शौक ही है जीवन की संतति,शौक से मिले आनंद अपार।। शौक…
Read More » -
साहित्य
आम
आम ले लो आम सस्ते लगे हैं दाम ,आम देखो ताजा ,खाने में है माजा ।सुंदर स्वादिष्ट लो ,मन भरकर…
Read More » -
साहित्य
समय को व्यर्थ न गंवाएं
“समय बहुत ही मूल्यवान हैव्यर्थ कभी मत खोनाहो जाता है एक घड़ी के लिएजन्म भर रोना”समय का महत्व हमारे जीवन…
Read More » -
साहित्य
सत शिक्षा अनमोल रत्न
सत शिक्षा है अनमोल रत्नकरो इसका मन से जतनसत शिक्षा जीवन को है संवारतीसत शिक्षा जीवन के मार्ग प्रशस्त है…
Read More » -
साहित्य
कविता
ईस तरह हाल मेरा जेसे ‘कोई दुल्हन गर्मी से परेशां लाजकि देहरी लाघँ बेनकाब हो गई ।कल तक तो सबकुछ…
Read More » -
साहित्य
जय बोलो श्री राम की
मैंने चोला श्रीराम का पहना,राह बड़ी बलिदान की।जय बोलो,जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।। गायत्री…
Read More » -
साहित्य
तन तो माटी का
तन तो बना माटी का ,तन मंदिर कहलाय ।ता में है आसन बना ,जा में है देव बैठाय ।।परमात्मा अंश…
Read More » -
साहित्य
ये रंग बदलते रिश्ते भी
ये रंग बदलते रिश्ते भी, कितने अजीब तमाशे हैं,चेहरों पर मुस्कान सजी, भीतर कितने निराशे हैं। कल तक जो अपने…
Read More » -
साहित्य
मुझे जान से प्यारा हिंदुस्तान
सुन कल भी था मेरा देश महान,आज भी है मेरा प्यारा देश महान,मुझे जान से प्यारा अपना हिंदुस्तान। गांधी नेहरू…
Read More » -
साहित्य
आँसू और साबुन
रुमाल ले लिया है किसी माह जबीन से,कब तक पसीना पोछते हम आस्तीन से।यें आंसुओ के दाग़ है आंसू ही…
Read More »









