Vijay Kumar
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साहित्य
शब्दों की दुनियाँ
एक बात बोलूं साहेब,शब्द अपने आप में एक ताकतवर होता है, मालूम है क्या किसी को हंसा देता है तो…
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साहित्य
पैसे से बैर
पैसे से बैर है तो पैसा ठुकराता हैमुफलिसी का जहां है ना कटता है ना जाता है पैसे से यारी…
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साहित्य
परिवर्तन
कुछ मिलता है ,कुछ खोता है,क्रम अनवरत चलता है।धूप-छाँव की आँख-मिचौली बन जीवन ये चलता है। पतझड़ आता जब उपवन…
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साहित्य
आपसी मनमुटाव ठीक नही
अब बातेँ नहिं होती है ,पहले खूब, बातेँ होती थी ,फिर अचानक, बातेँ बंद हो गई, ,ना जाने क्यों, समझ…
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साहित्य
गजल
काफिया —अन की बंदिशरफीद —ढूॅंढ़ता हूॅं मैं।बहर -2122–2222–2122-2=24मात्रा प्यार कान्हा से अपनापन ढूँढ़ता हूँ मैं,प्रेम रिश्तों में प्रिय बंधनढूॅंढ़ता हूॅं…
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साहित्य
माँ के अरघा {जंघा} पर नही रखें सर्प
शिव जी के {गले में सर्प} लिंग में नहीं रखें सर्प ।। द्वादश ज्योतिर्लिंग इसके प्रमाण ।। ‘।। गतानुगतिकोलोकः ।।…
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साहित्य
खड़ावदा की पुकार
आज अपना अस्तित्व मिटाने के लिए नहीं, अपने पास कोई स्थान,अपने गांव की धरती की धूमिल होती पहचान।आखिर कब तक…
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साहित्य
संस्कार और आत्मा का सफर
आत्मा अजर-अमर पुनर्जन्म में भी गुण-सूत्र न जाएं बिखरकैसे भी परिवार में हो पुनर्जन्म अच्छे-बुरे गुण-सूत्रमानव जीवन में अपने अस्तित्व…
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साहित्य
गज़ल – कभी तुम याद न आना
वक्त गुजरा है जो मेरा, कभी तुम याद न आना,बिछड़ गया हूं मैं उससे, कभी तुम याद न आना। तेज…
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साहित्य
यौवन को ठेंगा दिखा गई
जवानी आकर चली गईजर्जर काया बना गईदुविधा सुविधा के झूले मेंईंर्ष्या द्वैष की आग जलातन बदन को झुलसा गईतपन डाह…
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