Vijay Kumar
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साहित्य
सत्
चारों ओर विराजित जग में,सत्य सनातन रमा हुआ है।रोम-रोम, कण-कण में छाया,ग्रह, नक्षत्र, तारों को छुआ है। दशों दिशा में…
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साहित्य
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
एक बात बोलूं साहेब,भले आज हम बाल श्रम के खिलाफ है। लेकिन आज के बच्चे समय से पहले कुछ कर…
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साहित्य
बाल श्रम
अवसर- विश्व बालश्रम् दिवस मुफलिसी की बेगज़ब ये कैसी बेबसी हैखेलने खाने की उम्र मे कमाने की मजबूरी है तरक्की…
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साहित्य
प्रकृति का संतुलन आवश्यक क्यों है ?
किसी भी वस्तु को निरंतर चलायमान रखने के लिए संतुलन का होना अनिवार्य हो जाता है , क्योंकि संतुलन खोने…
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साहित्य
नन्हीं आँखों में
नन्हीं आँखों में सपनों का एक संसार बसा था,कंधों पर बस्ता होना था, पर श्रम का भार रखा था। जिस…
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साहित्य
ठहर ले चलों
एक पल बस ठहर ले चलो फिर चले,ख्वाब आँखों में भर ले चलो फिर चले।प्यार की आरती द्वार पर हो…
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साहित्य
शिक्षा और प्यार मांगते।।
विश्व बालश्रम निषेध दिवस विशेष। भीख नहीं अधिकार मांगते,शिक्षा और बस प्यार मांगते।खुब खेलना यूं हम है चाहते,हमारे चेहरे पर…
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साहित्य
बेबसी का इज़हार
लिखा तो हमसे कुछ जाता नहीहाल-ए-दिल बयाँ किया जाता नही प्यार तुमने गर किया थाए दिल सितम हमने भी सहा…
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साहित्य
यत्र तत्र सर्वत्र, ध्यान, मनन, चिंतन
मनुष्य जीवन लाखों जन्म के भोगोंके बाद ही बड़े भाग्य से मिलता है,यह जीवन जीना आसान नहीं होता है,परिस्थितियों से…
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साहित्य
संशय से भरी,प्रेम निवेदन
कोई थी.. लेकिन अभी नहिं है ,पास है, लेकिन दूर कहीं है ,कभी गलत थी, लेकिन अब सही हैमहसूस होता…
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