Vijay Kumar
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साहित्य
मेरी कलम से
मेरी कलम से सजे मेरे ख़्वाब भी हैं,कुछ अधूरे, और कुछ बेहिसाब भी हैं।मेरी कलम लिखती उन सवालों को भी,उन…
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साहित्य
झालमुड़ी और इस्तीफा
राकेश आनन्दकरझालमुड़ी खाकर हमने पत्नी से कहा –प्रिय ! तुम्हें इस्तीफा देने में क्या हर्ज है ।घर में आने वाली…
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साहित्य
सहारनपुर के कवि सुनील कुमार खुराना को शब्द मेघा सम्मान 2026 से किया सम्मानित
भारत की बात और नवभारत वार्ता डिजिटल समाचार पत्रों के वार्षिक उत्सव के पावन अवसर पर डॉ गुंडाल विजय कुमार…
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साहित्य
जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें
एक बात बोलूं साहेब,मेरे घर को मेरे अपनों ने ही तोड़ दिया है। मालूम है क्यों,क्योंकि उनको ही पता था…
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साहित्य
कैसे बताऊं कौन हो तुम
विधा-काव्य कैसे बताऊं कौन हो तुमदर्द कहूँ या जीने की उम्मीदबेवफा कहूँ या वक़्त का सितमहकीकत हो या सिर्फ फ़सानासमझ…
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साहित्य
मन के आंगन में
मन के आंगन में बचपन की मधुर यादें,म़न को आज भी हंसाती वह मधुर यादें,वह अम्मा का प्यार और नानी का…
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साहित्य
विजय और संघर्ष
पलकों में जो स्वप्न रुके हैं, अब उन्हें उजागर करना है,अम्बर तक उड़ान भरनी है, मुट्ठी में इसे भरना है।संघर्षों…
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साहित्य
गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर
रविन्द्र स्वर मधुमय गूँजे, हर उर में मृदु-प्यार,शब्द-सुमन में राग बसा है, झरता सुधि अमृत-धार।कोलकाता की पुण्य धरा पर, जन्मा…
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साहित्य
गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर।।
7 मई 1861 को जिनका जन्म हुआ,उनका कोलकाता पावन धाम हुआ।गीतकार बनकर वो उभरे जग में,मानवता का हमको संदेश दिया।।…
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साहित्य
नदियां
बाल अवस्था स्वभाव से चंचल घर छोड़ने को उद्धत रहती। छोड़ पिता का घर (हिमनद) जाने कौन दिशा को मचलती।…
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