Vijay Kumar
-
साहित्य
धूप
हमारे प्राण परेशान हो जाता कार्यरत करना कठिन होताशरीर से पसीना निकल जातासहसा हम अस्वस्थ बन जाताधूप से हम सावधान…
Read More » -
साहित्य
परिवार
बंधन है, रिश्तों का यह..जो, बांधे रखे एकसार।वात्सल्य लूटाते, दादा- दादी..ज्यों, वट वृक्ष छायादार । स्नेह से अभिसिंचित करते…कूट-कूट कर,…
Read More » -
साहित्य
जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।
जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।वो रातरानी की खुशबू और, तुम्हारी खिड़की याद आती है।। तेरा…
Read More » -
साहित्य
जख्मों की गहराई
जख्म कभी केवल त्वचा पर नहीं होते,वे भीतर उतर करआत्मा की तहों में घर बना लेते हैं। कुछ घाव दिखाई…
Read More » -
साहित्य
पति सिर्फ एक शब्द नहीं,
पति सिर्फ एक शब्द नहीं,ये सबसे महंगा सोना है।हर कोई समझ नहीं पाता इसको,बस इसी बात का रोना है।प्यार बाँटता…
Read More » -
साहित्य
माँ
माँ की ममता की ना समता,जग में काहू की ना क्षमता।माँ की दुआ फलै सब काहू,माँ की कृपा मिटै दुःख…
Read More » -
साहित्य
मैं कौन हूं
जन्म दिया प्रभु ने ,स्त्री बना कर भेजा हैकोमल हृदय, ममत्व से परिपूर्ण कर भेजा है बेटी बनाया किसी की…
Read More » -
साहित्य
परिवार
दादा दादी चाचा चाची ,माता पिता भाई बहन ।आदर स्नेह निष्ठा प्यार ,होता है जहाॅं निर्वहन ।।इन्हें मिलाकर है बनता…
Read More » -
साहित्य
गणितऔरजिंदगी
जीवन के गणित का, कुछ यूं ही रहा हालरिश्तों के गुणा भाग के लिए मन करे सवाल ।। अनगिनत भावों…
Read More » -
साहित्य
आजकल
शेर अब सियार से डरने लगे है,सियासत में सब रंग बदलने लगे है।जो कभी कहते थे नास्तिक है हम,वो आजकल…
Read More »








