Vijay Kumar
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साहित्य
वट सावित्री व्रत
ज्येष्ठ अमावस आई, वट छाया सुखदाई,सज-धज कर हर नारी, पूजा थाल सजाई। फल-फूल धूप दीप, श्रद्धा से मन महकाया,सावित्री के…
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साहित्य
फूल चमन में मुस्काते हैं
गीत फूल चमन में मुस्काते हैं।भोर हुई जब मंदिर आए,भक्ति वास मन को महकाए।फिर भी अंतर के आँगन मेंये शांत…
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साहित्य
जहाँ हरियाली की चादर है,
मन्नू वहीं चैन का यूं वास है।। वहाँ वर्षा की यूंं भरमार है,खुशहाली बडी़ ही कमाल है।जहाँ हरियाली की चादर…
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साहित्य
(no title)
विषय : परिवारविधा : कवितादिनांक : 15 मई , 2026 दादा दादी चाचा चाची ,माता पिता भाई बहन ।आदर स्नेह…
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साहित्य
परिवार जीवन की पाठशाला,
परिवार जीवन की पाठशाला,जहाँ मिलते अनगिन ज्ञान,छोटे-छोटे कदमों से ही,बनता है जीवन महान। माँ सिखलाती प्रेम और ममता,पिता संघर्षों का…
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साहित्य
परिवार
घर सिर्फ ईंटों से नहीं बनता,कुछ रिश्तों की गर्माहट भी चाहिए,थके हुए मन को सुकून देने वालीअपनों की आहट भी…
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साहित्य
एक सुबह सलौनी
हमारा परिवारविधा- कविता/गीत मैं तेरे जीवन में अब एक, सुबह सलौनी हूँ।तू मुझको इतना प्यार करे,फिर जानें क्यों कहे कि…
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साहित्य
अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस
परिवार एक रिश्तों का संगम हैअच्छे बुरे हर वक़्त को साथ मे सहजने का एक अविरल मन है परिवार एक…
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साहित्य
धूप
हमारे प्राण परेशान हो जाता कार्यरत करना कठिन होताशरीर से पसीना निकल जातासहसा हम अस्वस्थ बन जाताधूप से हम सावधान…
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साहित्य
परिवार
बंधन है, रिश्तों का यह..जो, बांधे रखे एकसार।वात्सल्य लूटाते, दादा- दादी..ज्यों, वट वृक्ष छायादार । स्नेह से अभिसिंचित करते…कूट-कूट कर,…
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