Vijay Kumar
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साहित्य
कवि डॉ. नीरज चौधरी “नीर” हुए संस्कारधानी जबलपुर में सम्मानित
संस्कारधानी जबलपुर में चतुर्थ वार्षिकउत्सव के अवसर पर कवि संगम त्रिपाठी जी संस्थापक हिंदी प्रचारिणी सभा एवंसशक्त हस्ताक्षर के संस्थापक…
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साहित्य
माँ: कुंडलियाँ छंद
माता ममता खान है,मां कोमल एहसास।माँ ही सचमुच ईश है,मां सुख का आभास।। माँ सुख का आभास,मित्र और प्रथम गुरु…
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साहित्य
माँ
माँ, तू कैसे जान जाती हैमैं क्या कर रही हूँ हर पल,मेरे हर कदम की आहट कोकैसे पहचान लेती है…
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साहित्य
माँ : ईश्वर का अलौकिक रूप
सूर्य सा उज्ज्वल रूप होती है मेरी माँ,ममता की सजीव मूरत होती है मेरी माँ।जिसके आँचल में हर दुख खो…
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साहित्य
मैं कौन हूं
‘मैं कौन हूॅं ‘ एक अहम रहा सवाल।ढूॅंढ चुकी इसका जवाब मिला नहीं हल।अपने अस्तित्व पर लगी रही हर पल…
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साहित्य
मातृ दिवस
विषय- मैं ओर मेरी बूढ़ी माँविधा- गध एवं मुक्तक जिन्दगी का हर कोई तलबगार नही होतासूरत-ए-इश्क़ का एतबार नही होता…
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साहित्य
माँ : तेरी यादों का आँचल
माँ की यादें आज मुझे फिर बहुत रुलाती हैं,बीते बचपन की मीठी बातें मन में मुस्काती हैं।तेरा हँसता भोला चेहरा…
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साहित्य
माॅं की ममता
विधा : पद्य माॅं की ममता ,माॅं की क्षमता ,दुनिया में कहाॅं ,माॅं संग समता ।माॅं ही शुभ दिन ,माॅं…
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मां के प्यार
इस जहां में मां के प्यार जैसा प्यार नहीं है ।इस जहां में मां के दुलार जैसा दुलार नहीं है।।मां…
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साहित्य
माँ
मां से सृष्टि का सृजन होतानवजीवन कि वह शिल्पकार।समस्त पवित्र संबंधों की निर्मातावात्सल्य की छाया अनुपम है स्नेह अपार। निस्वार्थ…
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