Vijay Kumar
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साहित्य
जननी (मां)
तुम हो स्वर्ग से बढ़कर जननी,तुम्हारे समान माँ कोई न अपनी तेरी सूरत, तेरी सीरत,हर देवी की लगती मूरत।जग की…
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साहित्य
असफलता डराती है
काम्पिटिशन अब बहुत बढ़ गया,वेकेन्सियां कम आती हैं।मेहनत करने के बाद भी,असफलता मिल जाती है।नकारात्मकता जन्म है लेती,उम्र भी हमें…
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साहित्य
ममता की छाँव में
गीत सृजन मुखड़ाऐ माँ तेरी सूरत से अलग,भगवान की सूरत क्या होगी।तेरे चरणों की धूल जहाँ हो,वो धरती ही जन्नत…
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साहित्य
पुंसवन संस्कार
{गर्भाधान संस्कार की पद्धति गर्भाधान संस्कार प्रयोग गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तक संस्कार प्रकाश को देखें}वास्तव में गर्भाधान संस्कार करना…
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साहित्य
ग़ज़ल
जैसा हूँ वैसा दिखता हूँ।महँगा हूँ सस्ता बिकता हूँ। मुझसे यूँ हैरान हैं सारे,मैं बातें सच्ची कहता हूँ। फुल्का हूँ…
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साहित्य
माँ — ईश्वर की अद्भुततम रचना
माँ की रचना अकल्पनीय, ईश्वर से भी न्यारी है,सृष्टि की सबसे सुंदर मूरत, जग में सबसे प्यारी है।प्रकृति की हर…
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साहित्य
अधूरी प्रीत का कबीर
मनवा लागो तोहसे रे, पर तोहे खबर न होय,हमरी सांसन में तू बसे, तोरे मन हम न कोय।नैनन बाट निहारते,…
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साहित्य
मां तो मां होती है
मां तो मां होती है,मां ममता कि मूरत होती है,मां शिवा दुनिया अधूरी है,मां के ममत्व प्रेम से संतानपूरी है,मां…
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साहित्य
माँ की दिव्यता
माँ जिसकी बराबरी कोईकर नहीं सकताउसकी जगह को कोईकभी भर नहीं सकतावह इस दुनिया कीअद्भुत कृति हैउसके मन में नहींकोई…
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साहित्य
ओइम परमात्मा
मां जन्मदात्री है, एक अक्षरीय रिश्ता अनुपम , अनुपमेय बरगद के वृक्ष सम जीवन के ताप में शीतलता प्रदान करता…
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