Vijay Kumar
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साहित्य
स्वयं की पहचान
मैं किसी की पसंदीदा नहीं, अब बनना भी नहीं चाहता,झूठी चाहत की भीड़ में, खुद को नहीं खोना चाहता। ज़रूरतों…
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साहित्य
सितम मौसम का
सितम मौसम का कहर बन फट रहा हैमनुष्य पशु पक्षी सभी का दम निकल रहा हैजल ही अमृत है जलदान…
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साहित्य
प्राकृतिक संसाधन और हम
आलेखः प्रस्तावना: हवा, पानी, जंगल, खनिज, मिट्टी—ये सब प्रकृति के उपहार हैं। पर पिछले 100 साल में इंसान ने इन्हें…
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साहित्य
चंदअल्फाज
उस रोज जिंदगी में,तुमको भुला ना ,पाऊं।चाहे कुछ भी, सजा हो मेरीमैं तुमसे ना दूर ,जाऊं,,।।2उस रोज जिंदगी में,,,1 चाहे…
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साहित्य
पनिहारीन
कौन नगरी तू है,कौन डगरी,,,,,।2कौन नगरीतू है कौन डगरी,,, तूने मुझको नहीं बतायातेरा पता मुझेनहीं पायातू है कौन नगरीतू है…
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साहित्य
मेरा अंतिम सत्य, राम ।।
मन के सब तार टूटेतन बना खिलौना रे,आत्म ज्योति चेतन हुईपरम ज्योति लीन रे,,मन के सब तार टूटेतन बना खिलौना…
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साहित्य
परिधि
परिधि से से न थे बाहरन ही कहीं सीमा अतिक्रमण हुआवही हुआ जो था परिधि मेन हीविधान की अवहेलना हुईहमारे…
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साहित्य
स्वतंत्रता के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह
आलेखः प्रस्तावना: 80 साल की उम्र में उन्होने तलवार उठाई थी।1857 की क्रांति का वर्ष। जब पूरा देश अंग्रेज़ों के…
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साहित्य
मातु वंदना
समय बड़ा अनमोल है, करना मत बेकार।बीता जीवन फिर कभी, मिलता नहीं उधार ।जो करता श्रमदान है,प्राप्त करें हर लक्ष्य,उस…
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साहित्य
हिन्दू अधर्म से डरते हैं |
हिन्दू अधर्म से डरते हैं |वे सोच सुपावन रखते हैं ||यह देश सभी धर्मों का है |सम्मान सभी का करते…
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