Vijay Kumar
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साहित्य
इजहार
इजहार करना,सबसे कठिन रहा मेरावर्षो तक प्रयासरत रहा,मन मेरामालूम था सारी बाते,मुझे उनकीफिर भी मन,खामोशी मे रहा मेरा । भय…
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साहित्य
मेरा हर शब्द कविता है….
विषय- दर्दविधा- कविताशीर्षक- तो ही मैं फिर समझूँगी मेरे इस कुछ पल लिखने से,गर कोई सुकूँ को पाता है। इन्हे…
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साहित्य
सिंह कन्ध जो श्याम सलोने हैं
सिया, राम- लक्ष्मण संग वन मेंचलते थक कर विश्राम कर रहे थे,वटवृक्ष तले शीतल छाया में बैठे,रघुबीर अगले पथ के…
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साहित्य
गरमी बेजा उबरानी
संजा आत देर से बेजा,थकी दुपहरिया जात नैया।सूरज इतई पे डारे डेरा,खूब कर रओ मनमानी। अबकी गरमी बेजा उबरानी। तन…
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साहित्य
नारी की व्यथा
विषय- नारी सशक्तिकरणविधा- कविता मैं नारी हूँ ,सबकी प्यारी हूँ,ये दुनिया मैंने सवारी हूँ,मैं जननी हूँ,फिर क्यो दुखों की मारी…
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साहित्य
मेरे राम।। तेरे राम।। सबके राम
राम नाम से ऐसी प्रीती हमको हो गई है।अपने प्रियतम के प्रेम में जैसे ये दुनिया खो गई है।प्रिय, प्रियतम…
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साहित्य
जानकी नवमी
राजा जनक जान थी जानकी ,विधि का विधान थी जानकी ,जनकपुर की अरमान जानकी ,बिहारी नारी महान थी जानकी ।जिस…
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साहित्य
नारी केवल प्यार नहीं
विषय- नरिसशक्ति करणविधा- कविता नारी केवल प्यार नहीं।नारी बस श्रृंगार नहीं।ये दुनिया की वो शक्ति है,जिसका पारावार नहीं। मानस देवी…
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साहित्य
विरह
प्रभु-सुमिरण से दूर हुआ हूँ, विरह मन को सूना कर गया।नाम बिना यह जीवन, विरह का बंजर बनकर रह गया।…
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साहित्य
प्रसन्नतापूर्वक प्रगतिशील रहा कीजिए
प्रसन्नतापूर्वक प्रगतिशील रहा कीजिए।कठिन परिश्रम की कहानी कहा कीजिए।।संघर्ष जारी रखते हुए सबकुछ सहा कीजिए।बस परिस्थितियों के अनुकूल ही रहा…
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