Vijay Kumar
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साहित्य
दुल्हन गीत
अपने राजा की मैं तो बनी रे ,,दुल्हनिया२। छन छन बाजे मेरी पैजनिया,,,।।हो,, छन छन बाजे मेरी पैजानिया,,अपने राजा की…
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साहित्य
गजल
मदहोश जिंदगी मेंकैसे तुम्हें भूलाऊं।2कहूं क्या मैं ,किसको जाकेहर तरफ ही तुझको पाऊं।।2मदहोश जिंदगी में,,,2कैसे तुम्हें भूलाऊं,,,हर तरफ ही तुझको…
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साहित्य
निराकार
करें कि पे यकीन हमजिसे ना देखा है,,।सुना है फकत उसको कहानी किस्सों में , ,,।। है वो मौजूद हर…
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साहित्य
रामनाम है सार
जीवन में रामनाम ही सार।जग है झूठों का बाजार। । रोते-रोते जन्म हुआ जब,हँसता रहा जग सारा।परिजन गुरुजन यही सिखाते,धनार्जन…
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धर्म
हिन्दू शब्द पर विचार
अद्भुतकोषके अनुसार हिन्दु और हिन्दू दोनों शब्द पुल्लिंग है ।दुष्टों का दमन करने वाले हिंदू कहे जाते हैं।सुंदर रूपसे सुशोभित…
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साहित्य
भगवान महावीर जगत कल्याणक
“सत्य का दीप प्रज्वलित कर जग को प्रकाशित किया‘जियो और जीने दो’का संदेश देकरजग में छाया”भगवान महावीर जैन धर्म के…
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साहित्य
मेरे पापा
लड़खड़ाती पैरों मे थे जब,उंगली पकड़ कर चलनासिखाया था आपने पापाजब रोते थे सिसक सिसक करएक दो पैसे देकर चुप…
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साहित्य
आप न होते तो हम ऐसे न होते
बिना तुम्हारे ये जीवन सूना-सूना सा था,दिल की धड़कनें भी रोती-रोती थीं, आँखें हमेशा नम थीं, आँसुओं की बाढ़ आती…
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साहित्य
संभावनाओं की सुबह
जीवन जीने का बहाना है ,जीवन गीतों का तराना है ,मर मरकर भी तो जीना है ,संभावनाओं की सुबह ये…
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साहित्य
अप्रैल फूल
पहली अप्रैल का आया दिन,हँसी से भर जाता है मन।इस दिन सब मज़ाक करते हैं,सब मिलकर थोड़ा हँसते हैं। कोई…
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