Vijay Kumar
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साहित्य
मेरे पापा
लड़खड़ाती पैरों मे थे जब,उंगली पकड़ कर चलनासिखाया था आपने पापाजब रोते थे सिसक सिसक करएक दो पैसे देकर चुप…
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साहित्य
आप न होते तो हम ऐसे न होते
बिना तुम्हारे ये जीवन सूना-सूना सा था,दिल की धड़कनें भी रोती-रोती थीं, आँखें हमेशा नम थीं, आँसुओं की बाढ़ आती…
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साहित्य
संभावनाओं की सुबह
जीवन जीने का बहाना है ,जीवन गीतों का तराना है ,मर मरकर भी तो जीना है ,संभावनाओं की सुबह ये…
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साहित्य
अप्रैल फूल
पहली अप्रैल का आया दिन,हँसी से भर जाता है मन।इस दिन सब मज़ाक करते हैं,सब मिलकर थोड़ा हँसते हैं। कोई…
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साहित्य
खनकते सिक्कों के बाज़ार में
खनकते सिक्कों के बाज़ार में अपना स्थान न बनाया जाए।भोर हुई और नया सूरज चमक उठा ऐसा शोर मचाया जाए।।…
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साहित्य
मूर्खता दिवस
मूर्खता जीवन का कोढ़ है ,मानव को करता भ्रष्ट है ।मूर्खता भरे इस जीवन में ,हो जाता बहुत कष्ट है…
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साहित्य
नई सुबह का सूरज
नई सुबह का सूरज ,नव ले आया प्रकाश ।सोकर जगीं चिडियाॅं ,ताजगी ले एहसास ।।चंदा भागा तारे भागे ,निशा गईं…
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साहित्य
दारू
विधा : हास्य ( भोजपुरी ) दारू पूछे मेहरारू से ,काहे नफरत दारू से ।हमरे कारण पति के ,आरती उतारे…
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साहित्य
अप्रैल फूल का महत्व
अप्रेल फूल का दिन, मजाक का दिनहंसने का दिन, खुशियों का दिनआज के दिन, लोग बनाते हैं मजाककहते हैं, “अप्रेल…
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साहित्य
अधूरी ख्वाइशो
पक्षियों की तरह उड़ना चाहताप्रभू को प्रत्यक्ष से देखना चाहताहिमालय पर्वत पर चढ़ना चाहतासमुद्र की टापू पर पार करना चाहताये…
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