Vijay Kumar
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साहित्य
कुछ तुम लिखो, कुछ हम लिखें
आओ चलो हम कुछ नया करेंकुछ तुम लिखो, कुछ हम लिखेंएक गीत लिखें साथ-साथ मिलकरतुम्हारी भावनाएं, हमारी रचनाएंआओ मिलकर बनाएं…
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साहित्य
रुला गए वो लम्हे
मोहब्बत की हसीं महफ़िल लुटा गए वो लम्हे,दिए जो ज़ख्म गहरे थे, रुला गए वो लम्हे। कभी जो धूप में…
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साहित्य
दहेज की लोभी कलयुगी माँ
बेटा ऊंची नाही मोहे सेज चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए,कोख मे रखी थी तुझे नौ मास मेरे लाल…
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साहित्य
बे-मशक्कत राजयोग
कलयुग है दिमागवालों की दूनियाँ हैजिसने चला लिया बस उसके ही आगे पीछे दूनियाँ है राजयोग काबिलियत पर अब गये…
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साहित्य
दारू का जीवन
छत्तीसगढ़ी गीत दारू मीठ–मीठ हँसाथे, पाछू आँसू दे जाय,घर–अंगना ल खाय धीरे, जिनगी राख बना जाय। पहिली–पहिली दोस्त कस लागे,…
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साहित्य
निष्ठा- कहानी
गाँव के छोर पर एक प्राचीन पत्थर का मंदिर था, जिसकी दीवारों पर समय की लकीरें साफ़ दिखती थीं। वहाँ…
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साहित्य
सकारात्मकता
सकारात्मक सोच की किरण जब मन में उतर जाती है,तो अँधेरी सी लगने वाली राह भी रोशन हो जाती है।निराशा…
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साहित्य
कपिलश फाउंडेशन द्वारा एक काव्य गोष्ठी
1 फरवरी 2026 को कपिलश फाउंडेशन के बैनर तले कपिलश साहित्यकार समिति खुर्जा शाखा द्वारा एक काव्य गोष्ठी का नगर…
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साहित्य
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साहित्य
इंतज़ार की रजिस्ट्री
खुदा की मंज़ूरी का एक सिरा अभी बाकी था,कि समय के साथ दुआओं का संचार होने लगा।‘फिर मिलेंगे कभी’— बस…
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